अंजुमन इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइनिंग
अंजुमन इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन डिज़ाइनिंग मुस्तहिक़ बच्चियों को कम फीस में मयारी ट्रेनिंग देकर उन्हें हुनरमंद और खुद्दार बनाने का मिशन है। 2021-22 से अब तक 400+ बच्चियाँ यहाँ से ट्रेनिंग हासिल कर चुकी हैं और अपने पैरों पर खड़ी होने की राह पर गामज़न हैं। यह महज़ कोर्स नहीं — बल्कि हुनर के ज़रिये रोशन मुस्तक़बिल की तामीर है। अंजुमन इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन डिज़ाइनिंग, अंजुमन वोकेशनल ट्रेनिंग मिशन का एक अहम शोबा है, जिसका मक़सद मुस्तहिक़ और बा-सलाहियत बच्चियों को हुनर के ज़रिये खुद्दारी और रोज़गार से जोड़ना है। यहाँ कम फीस में मयारी और प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग मुहैया कराई जाती है, ताकि माली मजबूरी किसी भी बच्ची की तरक़्क़ी में रुकावट न बने। 2021-22 से अब तक 400 से ज़्यादा बच्चियाँ इस मरकज़ से ट्रेनिंग हासिल कर चुकी हैं — जिनमें से कई ने सिलाई, डिज़ाइनिंग और बुटीक कार्य के ज़रिये अपनी आमदनी का ज़रिया पैदा किया। यह इंस्टीट्यूट सिर्फ़ फैशन डिज़ाइनिंग नहीं सिखाता, बल्कि एतमाद, हुनर और खुद्दारी भी देता है। जब एक बच्ची अपने हुनर से कमाना शुरू करती है, तो सिर्फ़ उसकी ज़िंदगी नहीं बदलती — बल्कि पूरे ख़ानदान की हालत संवर जाती है। अंजुमन इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन डिज़ाइनिंग मजबूरी को मौक़े में और हुनर को रोज़गार में बदलने का नाम है।
अंजुमन व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र
अंजुमन वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर का मक़सद मुस्तहिक़ नौजवानों और ख़वातीन को हुनर के ज़रिये खुद्दारी तक पहुँचाना है। कम फीस में फैशन डिज़ाइनिंग, सिलाई, कंप्यूटर, टैली, मेहंदी, केक मेकिंग और स्पोकन इंग्लिश जैसे स्किल-बेस्ड कोर्सेस मुहैया कराए जाते हैं, ताकि तालीम रोज़गार से जुड़ सके। यह महज़ ट्रेनिंग नहीं — बल्कि मजबूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफ़र है। इदारे ने तालीम के साथ-साथ हुनर को भी तरक़्क़ी की बुनियाद समझते हुए अंजुमन वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर का आग़ाज़ किया — ताकि मुस्तहिक़ नौजवान और ख़वातीन सिर्फ़ डिग्री तक महदूद न रहें, बल्कि रोज़गार के क़ाबिल बन सकें। यह सेंटर कम फीस में मयारी और स्किल-बेस्ड कोर्सेस मुहैया कराता है, जिनमें फैशन डिज़ाइनिंग, सिलाई, मेहंदी, केक मेकिंग, टैली अकाउंटिंग, बेसिक कंप्यूटर और स्पोकन इंग्लिश जैसे कोर्स शामिल हैं। मक़सद साफ़ है — हुनर के ज़रिये खुद्दारी और हलाल रोज़ी का रास्ता खोलना। 2021-22 से अब तक सैकड़ों बच्चियाँ और नौजवान यहाँ से ट्रेनिंग हासिल कर चुके हैं, जिनमें से कई अपने पैरों पर खड़े होकर न सिर्फ़ अपना, बल्कि अपने ख़ानदान का सहारा बन चुके हैं। अंजुमन वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर महज़ एक ट्रेनिंग मरकज़ नहीं — बल्कि मायूसी से उम्मीद तक, और मजबूरी से खुद्दारी तक के सफ़र का नाम है। यह वह जगह है जहाँ हुनर, हौसले से मिलता है — और मुस्तक़बिल रोशन होता है।
अंजुमन मिडिल स्कूल
इदारे ने 1989 में अंजुमन एजुकेशनल मरकज़ क़ायम किया, जिसके तहत अंजुमन मिडिल स्कूल की बुनियाद रखी गई। इस इदारे का मक़सद था — तालीम को आम करना और मुस्तहिक़ बच्चों को कम से कम फीस में मयारी (quality) तालीम फराहम करना। स्कूल को बेहद मामूली फीस पर चलाया जाता है, ताकि माली तंगी किसी बच्चे की तालीम में रुकावट न बने। इतना ही नहीं, मुस्तहिक़ और जरूरतमंद तलबा की फीस भी इदारा खुद अदा करता है, ताकि उनका तालीमी सफ़र बे-रुकावट जारी रहे। यह महज़ एक स्कूल नहीं, बल्कि नस्लों की तामीर का मरकज़ है — जहाँ तालीम के ज़रिये रोशन मुस्तक़बिल की बुनियाद रखी जाती है। सन 1989 में इदारे ने तालीम की अहमियत को महसूस करते हुए अंजुमन एजुकेशनल मरकज़ की बुनियाद रखी, जिसके तहत अंजुमन मिडिल स्कूल क़ायम किया गया। इस क़दम का मक़सद साफ़ था — माली तंगी की वजह से कोई बच्चा तालीम से महरूम न रहे और समाज के कमज़ोर तबक़े को भी मयारी और बाअसूल तालीम हासिल हो सके। स्कूल को बेहद कम फीस पर चलाया जाता है, ताकि आम और मुस्तहिक़ ख़ानदान भी आसानी से अपने बच्चों को तालीम दिला सकें। इदारा सिर्फ़ कम फीस तक महदूद नहीं रहता, बल्कि जो बच्चे सचमुच माली मजबूरी का शिकार होते हैं, उनकी फीस भी खुद अदा करता है — ताकि उनका तालीमी सफ़र बिना किसी रुकावट के जारी रहे। अंजुमन मिडिल स्कूल में तालीम के साथ अख़लाक़ी तरबियत, दीनी और दुनियावी रहनुमाई, और शख़्सियत की तामीर पर खास तवज्जो दी जाती है। यहाँ बच्चों को सिर्फ़ किताबों का इल्म नहीं, बल्कि बेहतर इंसान बनने की तालीम भी दी जाती है। यह मरकज़ महज़ एक स्कूल नहीं, बल्कि तामीर-ए-नस्ल और तामीर-ए-मुआशरा का अहम ज़रिया है — जहाँ से निकलने वाले बच्चे इल्म, अख़लाक़ और खुद्दारी के साथ अपने रोशन मुस्तक़बिल की तरफ़ बढ़ते हैं।