राहत व किफ़ालत
कैश इमदाद, माहाना व रमज़ान राशन, मेडिकल मदद, निकाह सहायता और रोज़गार इमदाद के ज़रिये ज़रूरतमंदों को सहारा दिया जाता है
राहत व किफ़ालत
कैश इमदाद, माहाना व रमज़ान राशन, मेडिकल मदद, निकाह सहायता और रोज़गार इमदाद के ज़रिये ज़रूरतमंदों को सहारा दिया जाता है
राहत व किफ़ालत के तहत इदारा मुस्तहिक़ अफ़राद और ख़ानदानों को फौरी और मुसलसल इमदाद फराहम करता है। राहत व किफ़ालत के तहत इदारा मुस्तहिक़ अफ़राद और ज़रूरतमंद ख़ानदानों को फौरी ही नहीं बल्कि मुसलसल इमदाद भी फराहम करता है। मक़सद सिर्फ़ अस्थायी राहत देना नहीं, बल्कि मुश्किल हालात में सहारा बनकर उन्हें इज़्ज़त और इत्मीनान के साथ ज़िंदगी गुज़ारने के क़ाबिल बनाना है। इस शोबे के ज़रिये: 4,200+ केसेज़ में कैश इमदाद देकर तंगदस्ती के लम्हों में सहूलियत पहुंचाई गई। 5,700+ मुस्तहिक़ ख़ानदानों तक माहाना और रमज़ान राशन किट तक़सीम की गई, ताकि किसी घर का चूल्हा ठंडा न रहे। 428 संगीन मेडिकल केसेज़ में बड़े ऑपरेशन्स, दवाइयाँ, जाँचें, डायलेसिस और रेगुलर इंजेक्शन्स तक का एहतिमाम किया गया। 133 निकाह केसेज़ में ज़रूरी घरेलू सामान और बरतन सेट फराहम कर के ग़रीब ख़ानदानों को कर्ज़ के बोझ से बचाने की कोशिश की गई। 84 अफ़राद को रोज़गार इमदाद देकर उन्हें हलाल रोज़ी से जोड़ा गया। इद्दत में ख़वातीन को नकद इमदाद, चार माह का राशन और बाद में रोज़गार का इंतिज़ाम भी इसी सिलसिले का हिस्सा है। यह महज़ आंकड़े नहीं, बल्कि हज़ारों दुआओं, मुस्कुराहटों और टूटते हुए घरों को संभालने की दास्तान है। राहत व किफ़ालत का यह सिलसिला आपकी ज़कात, सदक़ात और तआवुन से जारी है — ताकि कोई मजबूर हाथ फैलाने पर मजबूर न हो, बल्कि सहारे के साथ आगे बढ़ सके।
तामीर-ए-मुस्तक़बिल
तामीर-ए-मुस्तक़बिल के तहत इदारा मुस्तहिक़ और बा-सलाहियत तलबा को तालीम, स्किल डेवलपमेंट और रोज़गार के क़ाबिल बनाने में तआवुन फराहम करता है।
तामीर-ए-मुस्तक़बिल
तामीर-ए-मुस्तक़बिल के तहत इदारा मुस्तहिक़ और बा-सलाहियत तलबा को तालीम, स्किल डेवलपमेंट और रोज़गार के क़ाबिल बनाने में तआवुन फराहम करता है।
आला तालीम, स्कूल फीस इमदाद, प्रतियोगी इम्तिहानात की तैयारी और प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग के ज़रिये नौजवानों को खुद्दारी और रोशन मुस्तक़बिल की राह पर गामज़न किया जाता है। तामीर-ए-मुस्तक़बिल के तहत इदारा सिर्फ़ फौरी राहत तक अपनी खिदमत महदूद नहीं रखता, बल्कि मुस्तहिक़ और बा-सलाहियत तलबा को रोशन और मुस्तहकम मुस्तक़बिल देने का अहद करता है। हमारा यक़ीन है कि तालीम और हुनर ही वो बुनियाद है जिस पर खुद्दारी, इस्तेक़लाल और तरक़्क़ी की इमारत क़ायम होती है। इस शोबे के ज़रिये: 58 केसेज़ में आला तालीम के लिए माली तआवुन फराहम किया गया — जिसमें MBBS, M.Tech, MBA, BAMS, BHMS, BUMS जैसे प्रोफ़ेशनल कोर्सेज़ और NEET, IIT-JEE, PSC जैसी प्रतियोगी इम्तिहानात की तैयारी शामिल है। 262 तलबा की स्कूल फीस इमदाद की गई, ताकि तालीम का सिलसिला माली मजबूरी की वजह से मुनक़तेअ न हो। Anjuman Vocational Training Centre के ज़रिये फैशन डिज़ाइनिंग, मेहंदी, केक मेकिंग, सिलाई, टैली अकाउंटिंग, बेसिक कंप्यूटर और स्पोकन इंग्लिश जैसे स्किल-बेस्ड कोर्सेस कम फीस पर मुहैया कराए गए। 2021-22 से अब तक 400+ बच्चियाँ फैशन डिज़ाइनिंग में ट्रेनिंग हासिल कर चुकी हैं। स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत 100+ मुस्तहिक़ तलबा को हुनर और रोज़गार के क़ाबिल बनाया गया। यह महज़ तालीम नहीं, बल्कि तामीर-ए-शख्सियत और तामीर-ए-मुआशरा का सफ़र है। जब एक तलबा अपने पैरों पर खड़ा होता है, तो सिर्फ़ उसका घर नहीं, बल्कि पूरी नस्लें मजबूत होती हैं। तामीर-ए-मुस्तक़बिल का यह मिशन आपकी ज़कात, सदक़ात और तआवुन से जारी है — ताकि कोई ख़्वाब माली तंगी की वजह से अधूरा न रह जाए।